रात के सन्नाटे में जब कोई बात नहीं होती,
यूँ लगता है जैसे अब कोई रात नहीं होती।
आईना देखता हूँ तो ख़ुद से ही डर लगता है,
मुद्दतों से मेरी मुझसे मुलाक़ात नहीं होती
हम तो चुपचाप किनारे पे खड़े देखते रहे,
हर समंदर में उतरने की औक़ात नहीं होती।
दर्द चेहरे पे सजाकर भी हँसा जाता है राजेश
हर मोहब्बत में अश्कों की बरसात नहीं होती।
ज़िंदगी खेल है शतरंज का, बस इतना समझ,
चाल सही हो तो कभी मात नहीं होती।