अच्छा जीवन था हमारा,
उससे मिलने से पहले।
कोई शौक़ नहीं था,
उससे मिलने से पहले।
जी रहे थे हम आराम से,
अपने ही अंदाज़ में,
सच्चे थे हम,
उससे मिलने से पहले।
उससे मिलने के बाद
हम वैसे नहीं रहे,
जैसे पहले हुआ करते थे।
कुछ बदल गए हम,
कुछ सँवर गए हम,
अपने ही मन को
पहचानने लगे हम।
न जाने क्या था उसमें,
जो हममें कुछ बदल गया।
हम अब पहले जैसे नहीं,
मगर मन के अच्छे हो गए।