सबका ख्याल रखते-रखते वो खुद को भूल जाती है,
अपने हर अरमान को दिल के कोने में छुपाती है।
सबकी खुशी के लिए अपनी हंसी कुर्बान कर देती है,
ज़िंदगी के हर दर्द को चुपचाप सह जाती है।
आँखों में समंदर भरकर भी होठों से मुस्कुराती है,
सबकी उलझनों को सुलझाकर खुद तन्हा रह जाती है।
निस्वार्थ भाव से बस प्यार लुटाना ही जानती है,
वो एक औरत है।
खुद टूटकर भी पूरे घर को संभाले रखती है,
अपनी खुशियों से बढ़कर अपनों का सपना सजाती है।
सच्ची ममता और समर्पण की वो अनोखी मूरत है,
सबके लिए जीने वाली, वो एक औरत है।