कहना था …
कहना था कुछ और तुमसे कह कुछ और बैठा,
हालात थे कुछ ऐसे जो न करना था वो कर बैठा,
कुछ और नहीं अच्छे दोस्त हम बन सकते थे, तुम्हारी सादगी और मासूमियत का कायल हो बैठा।
उम्मीद थी तुमसे बहुत सारी बातें करने की,
पर अब क्या, तुम हमें गवां बैठे मैं तुम्हें गवां बैठा।