9. कभी सोचा न था कि तु मुझे इतना जलील करेगी किसी गैर के लिए मुझसे दलील करेगी,
तेरी याद में पागल न हो जाऊँ इस हद तक मुझे, तूने मजबूर किया,
पहनाकर उसको हार, भरी महफ़िल में,मेरी भावनाओं को तूने चकनाचूर किया,
मैंने....देखा हैं तेरी आँखों में... 2
वो गैर नही शायद तेरा कोई अपना हैं तु अब उसपे मरती हैं ये मुझे अब भी लगता कोई सपना हैं,
करके उससे ब्याह तूने बेवफाई की सारी हदें पार कर दी,
लाँघकर उसके दहलीज को तूने मेरे दिल की शरहदें पार कर दी।
:- रौशन कुमार केसरी
25.12.2025