जनाब, हमने ऐतबार किया तुमसे,
दिल खोलकर इज़हार किया तुमसे।
तुम्हारी हर ख़ूबी को
बारीकी से समझा हमने,
मगर अफ़सोस…
तुम हमें समझ न पाए।
कितने लम्हों से
तुम समझाना चाह रहे थे हमें,
कि कहीं किसी को
दुःख न हो मेरे जाने से।
हम समझकर भी
नासमझ बने रहे,
शायद सच सामने था,
फिर भी उसे समझ न सके।
तुम्हारी ख़ामोशी को भी
हमने बहुत कुछ कहता समझा,
मगर तुम्हारे जाने की बात को
दिल कभी समझ ही न पाया।