दो किनारे थे, दरिया एक था,
फ़ासला कम था, मगर रास्ता नेक था।
लहरों ने चाहा कि किनारे मिले,
मगर हर मोड़ पर बस इशारे मिले।
कुछ बातें हवाओं में घुल जाती हैं,
कुछ चाहतें ख़ामोशी में रह जाती हैं।
कुछ मुलाक़ातें मुकम्मल नहीं हो पातीं,
फिर भी उम्रभर यादों में रह जाती हैं। 🌊
~ Adya