पता नहीं अमीरी किसे कहते हैं…
मैंने तो खाली हाथों को भी
दूसरों के लिए बहुत कुछ देते देखा है,
और भरे हाथों को भी
दूसरों के सामने खाली देखा है।
कुछ लोग जेब से अमीर होते हैं,
मगर ज़मीर से बेहद गरीब।
और कुछ ऐसे होते हैं,
जिनके पास देने को शायद कुछ खास नहीं होता,
फिर भी उनका दिल इतना बड़ा होता है
कि अपनी आखिरी खुशी भी बाँट देते हैं।
मैंने ऐसे लोग भी देखे हैं
जो दूसरों की जरूरत में अपने हिस्से का सुख छोड़ देते हैं,
और ऐसे भी…
जिनके पास सब कुछ होता है,
फिर भी किसी के लिए कुछ करने से पहले
हिसाब लगाने लगते हैं।
इसलिए अब किसी के कपड़े, महल, गाड़ी
या जेब देखकर उसकी हैसियत नहीं आँकती।
क्योंकि वक्त ने सिखा दिया है…
अमीरी बैंक बैलेंस से नहीं,
नीयत से दिखाई देती है।
जिसे अपने होने पर इतना घमंड है,
उसे याद रखना चाहिए—
दौलत विरासत में मिल सकती है,
मगर औकात अपने कर्मों से बनानी पड़ती है।
और हाँ…
हमारे पास शायद दिखाने को बहुत कुछ नहीं,
लेकिन इतना जरूर है
कि किसी के सामने अपनी इंसानियत बेचकर
अमीर बनने की जरूरत नहीं पड़ी।
बाकी दुनिया जिसे अमीरी समझती है,
उसे मुबारक…
हमें तो अपने ज़मीर का अमीर होना ही काफी है। 🖤