*माता-पिता एक कवच कुंडल*
जिन हाथों ने हमें बचपन में चलना सिखाया,
आज वो बूढ़े हाथ अपनों के साथ को तरसते हैं।
पर आज के युवा मोबाइल की दुनिया में इतने खो गए हैं,
कि उनके पास अपने माता-पिता के लिए दो पल भी नहीं बचते हैं।
बात-बात पर झुँझलाना और 'यू डोंट अंडरस्टैंड' कहना,
कमरे का दरवाज़ा बंद कर, अपनी ही दुनिया में रहना।
भूल गए वो लोरियाँ, वो रात-रात भर का जागना,
ज़रा सी डांट पर अब माता-पिता को ही बुरा समझना।
जिस माँ की गोद में सुकून का हर लम्हा गुज़रता था,
जिस पिता के साए में डर भी दूर से ही डरता था।
आज वो ओल्ड-फ़ैशन और बोरिंग नज़र आते हैं,
बच्चे स्टेटस की दौड़ में, रिश्तों को पीछे छोड़ जाते हैं।
वक्त रहते संभाल लो ये अनमोल साया दोस्तों,
माता-पिता की आँखों में कभी आँसू न आने दो।
दुनिया के सारे गैजेट्स और दोस्त पीछे छूट जाएँगे,
जब ये बूढ़े हाथ एक दिन हमेशा के लिए सो जाएँगे।