किसी को आपकी गति समझ नहीं आएगी, क्योंकि उसने आपके कदमों का भार नहीं उठाया। किसी को आपकी चुप्पी समझ नहीं आएगी, क्योंकि उसने आपके भीतर चल रही लड़ाई नहीं देखी। किसी को आपकी मंज़िल छोटी लगेगी और किसी को बहुत बड़ी।
लेकिन आपकी मंज़िल का मूल्य किसी दूसरे की राय से तय नहीं होता।
इसलिए अपने रास्ते को दूसरों की नज़र से मत देखो।