मैंने सोचा ही तो था
मैंने सोचा था, तुम आओगे लौटकर...
थाम लोगे मेरा हाथ एक बार फिर से...
मैंने सोचा था, तुम्हारे लौट आने की आहट को...
तुम्हारी आवाज़ को...
शायद फिर महसूस कर पाऊँ...
ख़ैर, मैंने सोचा था...!!
तुम्हारे जाने के बाद भी शायद हमारे बीच कुछ बाक़ी रहा होगा...
शायद वो समय,
जब तुम बिना कुछ कहे चले गए...
मैं शायद अब भी यहीं रह गई...
तुम्हारे लौट आने की उम्मीद में।
पर कुछ लोग लौटकर नहीं आते हैं...
आती है तो उनकी याद...
ख़ैर...!!
मैंने सोचा ही तो था...