सब एक से हैं जहाँ में, तो जुदा कौन है?
जो दिखा ही नहीं, तो कैसे कहूँ कि ख़ुदा कौन है?
हर चेहरे पे एक नूर है, तो फिर ये पर्दा कौन है?
हर दिल में एक धड़कन है, तो फिर ये तन्हा कौन है?
जो लफ़्ज़ों से परे है, उसका ज़िक्र क्या है?
जो आँखों से न दिखे, उसकी फ़िक्र क्या है?
मैं ख़ुद को ढूँढने निकली , तो सवाल मिल गया,
जिसे समझा था दूर, वो मेरे ख़याल मिल गया।
अब सजदों में क्या माँगूँ, जब अंदर ही जहान है,
शायद जिसकी तलाश थी… वो मेरे ही दरमियान है।✨🤌🏻
~ आद्या