जीवनसाथी को लेकर मैने अनेक सपने सजो रखे है
अगर उसने मेरे सपनो के बारे में पूछा ही नहीं तो......
सिर्फ जीवनसाथी मिलना काफी होगा क्या.....
अगर उसने मुझे अपनी धर्मपत्नी ना मान कर सिर्फ उपभोग की वस्तु समझा तो.....
मेरी पसंद ना पसंद जानने की कभी कोशिश ही नहीं की तो.....
कभी दूसरों के सामने मुझे सम्मान नहीं दिया तो.....
हमेशा मेरी तुलना दूसरों से की तो....
मेरे रोने पर रोने का कारण नहीं पूछा तो....
मेरे दुख दर्द का साथी नहीं बना तो......
बीमार पड़ने पर मेरी परवाह नहीं की तो....
मुझे अपने प्रेम के लायक नहीं समझा तो.......
मेरे जीवन के खालीपन को नहीं भर पाया तो....
तो क्या करूंगी ऐसे मृत पाषाण हृदय के जीवनसाथी का मुझे बयान करने के लिए शब्दों की कमी महसूस हो रही है।
✍️ अंतिमा 😊