भीगी हुई ज़ुल्फ़ों से टपकती पानी की बूँद,
सरगोशियों में जागता एक गहरा जुनून।
क़रीब आते ही तेज़ होती यह धड़कन,
पिघलती हुई साँसों से मिटता यह बंधन।
भीगी हथेली पर सुलगती हुई आँच,
दो जिस्मों के बीच पिघलता हर एक काँच।
मदहोश निगाहों में छुपी एक मीठी प्यास,
इस तूफ़ान में बस तेरा ही गहरा अहसास।