तुम देखो ना, मैं यहाँ बैठकर रो रहा हूँ,
तुम्हें दिख रहा है ना, मैं कितना तड़प रहा हूँ।
आँखों में ठहरी हैं अब भी तुम्हारी ही तस्वीरें,
मैं हर रात उन्हीं तस्वीरों से बातें कर रहा हूँ।
कहते हैं लोग, वक्त हर दर्द मिटा देता है,
मगर मैं तो हर रोज़ उसी दर्द में जी रहा हूँ।
तुम्हें आवाज़ देता हूँ खामोशियों के सहारे,
तुम सुन रही हो ना… फिर क्यों नहीं आ रही हो?