प्यार में रोकटोक करना गुनाह है? ।
सोचा था वो समझेगी मेरे जज्बातों को पर नहीं उसे तो वो मेरा शक़ करना लगा। उसे मेरी रोकटोक से नाराजगी जतानी आती है नहीं के मेरी उसके प्रति वफादारी। वो सोचती हे कि वो बड़ी हो गई है उसे सब समझ आता है पर उसे कौन समझाए कि ए कलियुग है यहाँ हर कोई उसका हितेछु नहीं है। आज के जमाने में हर कोई अपना फायदा ढूंढता है। यहाँ ना किसी को किसी से प्यार हे ना किसी को किसी की फिक्र हे। सब अपने अपने मतलब के लिए जीते है । सब अपनी अपनी भूख मिटाने के लिए जीते है। कोई पेट की भूख मिटाने के लिए तो कोई हवश कि भूख मिटाने के लिए जीता हे। वो जिनके साथ हंसी से बात करती है उनकी निगाहों में वो क्या मायने रखती है उसे नहीं पता। उसे लगता हे कि उससे हंसके बात करने वाला उसका अच्छा मित्र है पर वो मित्र के दिल मे क्या चल रहा हे वो सिर्फ मुझे पता है। वो समझती है की जो अपने पार्टनर को हमेशा खुश रखे उसकी हरेक इच्छा पूरी करे वो ही सच्चा पार्टनर होता है। उसे जो चाहिए वो लाके दे। जब चाहे उसके लिए हाजिर हो। सबकुछ उसके हिसाब से हो। हा में हु ओवर थिंकर। हा हु में पझेसिव। में करता हु रोकटोक ये करो ये ना करो ये पहनो वो मत पहनो करता हु सब पर किसके लिए? मुझे तुम जैसी हो वैसी ही पसंद हो तो फिर वो दिखावा किसके लिए करना है? किसको बताना है? ओर क्यों बताना है? मेरे हिसाब से रोकटोक करने का हक उसीका है जो आपको अपना मानता हो।