अकेले आए थे, अकेले जाएंगे।
सच की आस में ,
जीवन की भड़ास में,
मन की त्रास ने,
सच की तलाश में,
सब कुछ सिखा दिया ,
कि अकेले आए थे अकेले जाएंगे।
आंखों से खात्मा ने,
हृदय से परमात्मा में,
धोखे से आत्मा ने,
विश्व से रक्मा में,
यह भी सिखा दिया,
कि अकेले आए थे और अकेले जाएंगे।
शायद यही शक्ल बनाया,
भ्रम को बहुत दूर भगाया।
यही जीवन का सजीवन बूटी कहलाया,
माता-पिता से है यह आग्रह आया,
एक बार तो प्राण भी लेना पर हाथ कभी ना छोड़ना,
अकेले आए थे ,अकेले जाएंगे