कभी सोचा है…
सबसे ज़्यादा दर्द किसी अजनबी के जाने
से नहीं होता,
बल्कि उस अपने के बदल जाने से होता है,
जिसे हमने अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना
लिया था।
कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसा मोड़ आता है,
जहाँ हम सोचते हैं कि अब सब ठीक हो
जाएगा…
पर वक्त धीरे-धीरे हमें सिखा देता है
कि हर चीज़ को वैसे नहीं रखा जा सकता
जैसे वो पहले थी।
जो हँसी पहले एक नाम सुनते ही आ
जाती थी,
वही नाम अब दिल को चुभता है।
जो इंसान कभी हमारी खुशियों की
वजह था,
वो आज हमारी खामोशी की वजह बन
जाता है।
पर ज़िंदगी की सच्चाई यही है —
हर रिश्ता हमेशा नहीं रहता,
हर अपना हमेशा अपना नहीं होता।
कुछ लोग सिर्फ वक्त के मेहमान होते हैं,
जो सिखा कर चले जाते हैं कि खुद से
प्यार करना भी ज़रूरी है।
हम बार-बार दूसरों में सच्चाई ढूंढते हैं,
पर भूल जाते हैं कि सबसे सच्चा रिश्ता
हमारा खुद से होता है।
जब हम खुद को समझ लेते हैं,
तो किसी के बदल जाने का डर नहीं रहता।
कभी-कभी अकेलापन सज़ा नहीं होता,
वो एक मौका होता है —
खुद को फिर से जानने का,
अपनी सोच को साफ करने का।
क्योंकि जो चला गया, वो शायद इसलिए
गया
ताकि तुम खुद को पा सको।
याद रखो,
ज़िंदगी हर दिन नया सबक देती है —
कभी दर्द के रूप में, कभी सुकून के रूप में।
पर हर सबक हमें मज़बूत बनाता है।
तो अगर कोई चला गया है,
तो उसे शुक्रिया कहो —
क्योंकि उसने तुम्हें सिखाया कि
अब किसी के जाने से टूटना नहीं,
बल्कि मुस्कुराना है।