विकलांग एक ऐसा शब्द इसके बारे में सब लोग जानते हैं मोदी जी ने विकलांग की जगह दिव्यांग शब्द प्रयोग करने के लिए कहा है लेकिन मेरा सवाल यह है क्या सिर्फ एक शब्द बदल देने से सब कुछ बदल जाएगा क्या यह भी बदल जाएगा कि आज भी हमारे कितने ऐसे ट्रेन स्टेशन होते हैं जहां पर व्हीलचेयर भी नहीं होती या अगर होती है तो फ्री की व्हीलचेयर लेने के लिए भी एक्स्ट्रा पैसे देने पड़ते हैं हां मैं मानती हूं सरकार ने सुविधाएं दी है लेकिन बहुत कुछ अभी भी किया जा सकता है कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें अगर सही सुविधामिले तो वह अपने भविष्य को अच्छा बना सकते हैं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो पढ़ना चाहते हैं पर वह नॉर्मल स्कूल या कॉलेज नहीं जा सकते अब यहां कुछ लोग कहेंगे अरे ऑनलाइन तो पढ़ाई होती है आजकल बात सही है ऑनलाइन होती है लेकिन ऐसे लोगों के लिए कोई स्पेशल व्यवस्था होनी चाहिए कोई ऐसा ऑनलाइन कोर्स कोई भी ऑनलाइन सेंटर या कुछ भी जो इन लोगों की मदद कर सके अगर ध्यान से देखा जाए तो अभी तक ऐसा कुछ नहीं है और यह तो कहना ही बेकार है कि हमारे देश के पास पैसे नहीं है पैसे तोइतने हैं कि हर सरकारी पद पर बैठा हुआ आदमी चाहे वह छोटा से छोटा हो या बड़े से बड़ा रिश्वत लेने में परहेज नहीं करता तो फिर हम एक ऐसा सिस्टम क्यों नहीं बना सकते जहां उन लोगों की भी सपने पूरे हो सके उन्हें कोई रास्ता मिल सके एक शुरुआत तो कर ही सकते हैं ना कहीं भी जो किसी ही मंदिर में या कहीं भी चले जाओऐसे लोगों के लिए व्हीलचेयर तक आसानी से उपलब्ध नहीं होती है क्या उनका अधिकार नहीं है कहीं आना-जाना इस दुनिया को देखना आप उनके प्रति हम दर्दी रखिए दया रखिए सहानुभूति रखिए लेकिन उन्हें खुद से अलग मत समझिए वह भी इंसान है हां शायद आपसे थोड़े अलग लेकिन आखिर में वह भी इंसान है उनका भी दिल होता है सपने होते हैं उनसे भी गलतियां होती हैं लेकिन हमारे आसपास के लोगों की सबसे बड़ी गलती क्या है पता है हम लोग उन्हें हमेशा अलग नजर से देखते हैं अरे क्यों आखिर वह लोग भी इसी देश के नागरिक है अगर उन्हें सही मार्गदर्शन मिले तो वह भी बहुत कुछ कर सकते हैं उन्हें दया की जरूरत नहीं है प्यार और अपनेपन की है किसी समझ पाने वाले इंसान की है जो उनका अकेलापन समझ जाए पता नहीं यह अंतर कब मिटेगा उन्हें भी अपनी जिंदगी जीने का उतना ही हक होता है जितना किसी और को और अगर उन्हें समाज से दरकिनार कर दिया जाए फिर अगर उनसे कोई अपराध हो जाए तो लोग कहेंगे अरे यह तो विकलांग था आखिर कब मिटेगा यह अंतर अगर आपके आसपास ऐसा कोई है तो उसके अकेलेपन को समझिए उसके गुस्से में छपी उसे तड़प को समझिए जिसे वह सालों से जीता आया है