लगभग हर कोई है कहता है माफ कर दो भूल जाओ आगे बढ़ो लेकिन असलमें कितने लोग ऐसा कर पाते हैं कुछ बातें कहने सुनने में बहुत आसान होती है लेकिन जब अमल करने का वक्त है तो उतना ही मुश्किल हो जाता है उन पर अमल करना क्योंकि कभी-कभी कुछ बातें माफ करने से भूली नहीं जाती बस दिल के किसी कोने में रह जाती है कभी-कभी ना चाहते हुए भी आगे बढ़ना पड़ता है और कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे इस दुनिया के भीड़भाड़ चकाचौंध में हम बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं कभी-कभी लगता है कि अरे उसकी जिंदगी तो इतने अच्छे से आगे बढ़ रही है मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है मेरी जिंदगी में इतनी परेशानियां क्यों है कई बारलोग इसे जलन का नाम दे देते हैं लेकिन हर बार की जलन हो यह जरूरी नहीं है कई बार आप अपनी परिस्थितियों की दूसरों से तुलना भी करने लगते हैं अब तुलना करना सही है या गलत यह नहीं कह सकती हूं क्योंकि बचपन से हमने हमारे आसपास यही सब देखा है बचपन में मां-बाप तुलना करते हैं कि अरे उनके बच्चे तो इतने अच्छे हैं तुम वैसे क्यों नहीं हो बड़े होते होते हम खुद अपनी तुलना दूसरों से करने लग जाते हैं और फिर जब कोई हमसे पूछे तो हम भी ज्ञानी बनाकर ज्ञान देते हैं कि अपनी तुलना दूसरों से कभी नहीं करनी चाहिए लेकिन यह ऐस चीज है इससे कोई कभी नहीं बच सकता हां इतना जरूर कह सकती हूं कि जब भी किसी की जिंदगी में कुछ अच्छा होता हुआ देखिए तो उससे जलन मत रखिए बस भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं कि हमारी जिंदगी में भी सब कुछ अच्छा हो या फिर सब कुछ अच्छा होने की कम से कम एक शुरुआत तो हो मेहनत तो सबको अपनी तरफ से करनी ही पड़ती है