क्या करूँ
क्या करूँ
मैं क्या करूँ
जन्मदिन है मेरा
पर किसी को याद नहीं,
अभी तक किसी ने नहीं दी बधाई।
क्या सबको बताऊँ
क्या शोर मचाऊँ
क्या मैं किसी के लिए खास नहीं हूँ
क्या मुझसे किसी को प्यार नहीं है?
मैं तो सबका जन्मदिन रखती हूँ याद
सबसे पहले देती हूँ बधाई,
निस्वार्थ सबकी सहायता भी करती
कभी किसी से कोई उम्मीद भी नहीं करती।
फिर क्यों ये अकेलापन है
क्यों नहीं किसी को मेरी याद आई
क्या करना होता है
सबका चहेता बनने के लिए?
जरूरत बनना पड़ता है
जरूरत पड़ने पर ही
याद आती हूँ सबको।
इतना बुरा भी नहीं है अकेलापन
खुश हूँ मैं अपनी दुनिया में
ये प्रकृति साथ है
मेरे महादेव मेरे साथ हैं
मेरे सपने साथ हैं।
झूठे रिश्तों की राह तकनी ही क्यों
किसी से कोई उम्मीद रखनी ही क्यों
मैं और मेरे सपनों की दुनिया
काफी हैं खुश रहने के लिए
मैं खुश हूँ।
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली