क्या कहूं और क्या नाम दूं उसे
जो छाया था कभी दिल पर मेरे
कैसे भुला दूं उसको पल में
जो कभी पर हमेशा साथ था मेरे
कहने को तो एक अनजान था वो
पर शायद तुम नहीं कोई और था वो
न जाने क्यों हम उनको तुम समझ बैठे
और तुम्हे अपना मानने की गलती कर बैठ
तुम हो तो वही पर लहजा थोड़ा अलग है
जिसको मैंने देखा वो कुछ अलग है
उसने इश्क किया तुम धोखा देते हो
उसने साथ दिया तुम ज़ख्म देते हो
फर्क बस इतना है..
उसने प्रेम दिया और तुम प्रेम कहते हो
Ms rajaput