जितना सताना है सताले ऐं जिन्दगी
इक दिन हमें मनाने में तेरे पसीने छुट जायेगें
तप रहा सुरज ढल रहा है
आग का गोला फिलहाल चाँद लग रहा है
उसने प्याला जहर का उठाया और पी गया
ये तमाशा देखा था घर के आईने में मैनें
दिल बहलाने किधर जाऊं
जिधर भी जाऊं उदास मंजर उदास करते हैं
लहु टपकता है आंखों से तेरे
और किजिए इश्क सच्चा किसी से