Hindi Quote in Poem by Vikash Viplao

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

मेरी सजनिया
Poet : विकाश विप्लव

आरंभ है मेरा, वो मेरा अंत भी। मेरी हर सांस है, उसका प्रेम लिए अनंत भी।
निश्चल है वो जैसे पानी, चंचल है जैसे हिरनी। पुष्प सी कोमल है वो, सुंदरता में जैसे मोरनी।।

राम की सीता है वो, कृष्ण की गीता भी। राधा का वियोग वो, मीरा का प्रयोग भी।।

केश उसके ऐसे जैसे काले मेघ घिरे हो चाँद को। सजगता उसमें ऐसी जैसे हिरनी देख रही शेर की मांद को।।

पलकें जब झुकाती है, निशा सो जाती है सागर की गोद में। पलकें जब उठाती है, सुबह अंगड़ाई लेती है सूरज की आगोश में।।

उसकी आँखें जिधर देखती छिड़ जाता एक अनोखा प्रसंग। आवेश उनमें, क्लेश उनमें, प्रेम का कल्पित तरंग।।

वो मौजों से भी मनोरम और सागर से गहरी है। होंठ जैसे गुलाब की दो पंखुड़ियाँ, नख़्श भी सुरीली है।।

दांत ऐसे जैसे मोतियों के हार की चमचम चमका। कुछ बोल कर हंसती ऐसे जैसे कोयल की कूंक की खनक।।

आवाज़ ऐसी जैसे माँ सरस्वती के वीणा की तान। भंवरे की गुंजन उनमें, पवित्रता में जैसे पुराण।।

नाज़ुक सी कलाई उसकी, पतली पतली उंगलियाँ। चूड़ियाँ बजती हाथों में जैसे संगीत की स्वर लहरियाँ।।

वो मेरी प्रीत है, मनमीत है, मेरे जीवन का हर संगीत है। मेरी हर कल्पना वो, लिखा हुआ मेरा हर गीत है। संघर्ष मेरा, हार मेरी, वो मेरी हर जीत है।।

Hindi Poem by Vikash Viplao : 112035798
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now