बहुत दिनों से यह बात मन में थी सही तरह से लिख पाऊंगी या नहीं यही सोच रही थी आजकल की टीवी सीरियल्स में भगवानों का चरित्र कैसा दिखाया जाता है मेरा मतलब है चाहे कोई भी टीवी सीरियल देख लो हर कोई अपना एक अलग वर्जन दिख रहा है जो असली पुराणों में लिखा ही नहीं गया चाहे वह राधा कृष्ण टीवी सीरियल हो या फिर कोई भी टीवी सीरियल ऐसा लगता है सारी कहानी बस मन से बनाई हुई कहानी है मां रुकमणी को किसी जलनशील औरत के रूप में दिखा दो जिन्हें राधा जी से जलन होती है ऐसा कहां लिखा है कौन से पुराणों या फिर किस ग्रंथ में लिखा है सूर्यपुत्र कर्ण टीवी सीरियल में सूर्यपुत्र कर्ण के किरदार को इतना महान दिखा दो जैसे लगे कि उसके सामने पांडव और साक्षात कृष्ण भी कम पड़ जा रहे हैं किसी और टीवी सीरियल में शक्ति शिव का अपमान करती है कार्तिकेय को एक बिगड़ा हुआ बच्चा दिखाया जाता है कहानियां अपने हिसाब से तोड़ी मरोड़ी जाती है जबकि यह सिर्फ कहानियां नहीं है यह धर्म का आधार है ठीक है अगर आपको भगवान को नहीं मानना आप मत मानिए लेकिन इस तरह से अपनी मन से बनाई हुई कहानियों को टीवी पर दिखाकर आप क्या साबित कर रहे हैं यही कि भगवान श्री कृष्ण का महारास आत्मा और परमात्मा का मिलन नहीं बल्कि एक हिसाब से कह तो आपने उन्हें एक प्लेबॉय जैसा बना दिया क्या ऐसा किसी और धर्म में या किसी और धर्म के किसी धार्मिक किरदार के साथ संभव हो पता नहीं क्योंकि तब वह लोग जो हालत आपकी करते उसके बारे में आप सोचना भी नहीं चाहते आप किसी इंसान की कहानी को तोड़ मरोड़ कर दिखाइए ना कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन आजकल के बच्चे कोई ग्रंथ नहीं पढ़ते बच्चे तो क्या कोई बड़ा भी नहीं पढता ऐसे में आप अपने हिसाब से इन कहानियों को तोड़ मरोड़ कर सबके सामने दिखाएंगे तो क्या होगा सालों पहले आई रामानंद सागर जी की रामायण आज भी देखने में अच्छी लगती है उनके किरदारों को देखकर भगवान जैसी भावना मन में आती है जबकि उस समय तकनीक कितनी अच्छी नहीं थी शायद उनके पास उसने पैसे भी नहीं रहे होंगे लेकिन वह पूरी श्रद्धा से दिखाना चाहते थे जो भी हमारे ग्रंथो में लिखा हुआ है लेकिन आज क्या हो रहा है अपने हिसाब से कुछ भी तोड़ मरोड़ कर दिखा दो और कह दो मेरे हिसाब से ऐसा होना चाहिए था यह मेरा वर्जन है क्या यह गलत नहीं है कभी जौहर को बुरा कह दो और जोहर करने वाली महारानी पद्मिनी और सारी स्त्रियों को कायर बिना उस समय की परिस्थितियों को समझे हुए उस समय आज जैसी परिस्थितियों नहीं थी कभी कन्यादान का असली मतलब समझे बिना ही उसे बुरा कह दो कभी मूर्ति पूजा को बकवास बता दो मैं कहती हूं क्या बुराई सिर्फ हिंदू धर्म में ही है दूसरे धर्म भी तो है जाकर उनके बुराई के बारे में बात करो ना वह कोई नहीं करेगा