कविता सत्यम शिवम सुंदरम
कवयित्री डॉ.वंदना शर्मा
सच कड़वा होता है
वीभत्स, कुरूप
जब सामने आ जाए
सुन्दर होता है
तभी तक
जब तक पर्दे में रहता है
सच देखना
और भी मुश्किल
स्वीकारना तो
और भी मुश्किल
बोलना कभी-कभी
आसान लगता है
लेकिन सच सुनना
और भी मुश्किल
फिर क्यों कहा गया
सत्यं शिवं सुन्दरम्
सच तो अकेला
कर देता है
सबके मुखौटे
उतार देता है
सच बोलने वाला ही
सबको बुरा लगता है
झूठ कितना सुंदर होता है
बचे रहते हैं रिश्ते
झूठ के कारण
खुशी का भ्रम रहता है
झूठ के कारण
सारी खुशियां झूठ का पर्दा
हटते ही गायब हो जाती हैं
कलयुग है ये जनाब
सच अकेला मिलता है
झूठ के साथ मेला चलता है
जो हितकर है
कल्याणकारी है जो सबके लिए
वो झूठ भी सुंदर होता है
जनहिताय बोला गया
झूठ जब सत्य बन जाए
तब ही सत्यं शिवं सुंदरम् होता है।
डॉ. वंदना शर्मा नई दिल्ली
vandna.reporter@gmail.com
6/9/26