मेरा वजूद
मैं किसी की ख़्वाहिशों का मोहताज़ नहीं,
मेरा वजूद ख़ुद मेरी पहचान है।
ज़माने की नज़रों में चाहे जो भी हूँ मैं,
मेरी हिम्मत ही मेरा असली आसमान है।
नाप नहीं सकती यह दुनिया मेरी उड़ानों को,
मैंने ख़ामोशी से अपने पंखों को तराशा है।
गिरे हैं कई बार, पर हर बार उठे हैं,
ज़िंदगी की हर चुनौती को हँसकर तराशा है।
न मुझे किसी के सहारे की तलाश है,
न ही किसी की दी हुई पहचान चाहिए।
मैं अपनी राह ख़ुद बनाती चली जाऊंगी
मुझे बस अपने सपनों का वो जहान चाहिए।
जो आज ढला है, वो कल फिर उगेगा,
मैं उस सूरज की तरह अटूट विश्वास हूँ।
मेरी सादगी ही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है,
मैं ख़ास नहीं, पर ख़ुद में बेमिसाल हूँ।