Hindi Quote in Poem by Deepak Kumar Tiwari

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नयन मूँद कर जो मुस्काए, वो चितचोर आया है

यमुना की लहरें थिरक उठीं, अंबर ने बदला राग है,
भाद्रपद की इस काली रजनी में, जागा धरा का भाग्य है।

कंस के पहरे सो गए सारे, बंधन खुद ही टूट गए,
पाप की लंका ढहने को है, सारे संशय छूट गए।गोकुल की गलियाँ महक उठीं, माखन की मटकी डोल गई,

बंसी की पहली तान आज, हृदय के ताले खोल गई।
वो नीलकमल-सा श्याम वरण, वो मोरमुकुट की छाँव प्रिये,
ब्रज मंडल का कण-कण नाचे, झूम उठा है गाँव प्रिये।
कोई कहता है माखनचोर, कोई कहता है नंदनंदन,
जो कालिया के फन पर नाचे, वही है जग का अभिनंदन।

द्रौपदी की लाज बचाने वाला, अर्जुन का वो सारथी महान,
गीता का जो उपदेश बना, वो अविनाशी पुरुष प्रधान।
आओ हम सब दीप जलाएं, मन के कान्हा को आज
जगाएं,छोड़ के सारे बैर-भाव, कान्हा के रंग में रँग जाएँ।
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की,धरा पे फिर से गूँज उठी है, महिमा दीनदयाल की।

Hindi Poem by Deepak Kumar Tiwari : 112035472
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