इस भाग दौड़ और शोर से भरी हुई दुनिया में लोगों के पास किसी की मदद करने के लिए समय नहीं होता लेकिन किसी को भी देखकर राय जरूर बना लेते हैं दूसरों की तो बात छोड़िए हम कब बिना किसी शोर शराबे के खुद के साथ बैठे थे यह याद करना भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि आजकल सबके पास फोन है सब की कहानी वही है फोन कभी हमें चैन से बैठते ही नहीं देता सोशल मीडिया इंस्टाग्राम इस दुनिया से निकलने के बाद ही तो फुर्सत होगी किसी को यह सब सोचने की और इंस्टाग्राम को तो इंस्टाग्राम से बदलकर ज्ञान की दुकान का देना चाहिए क्योंकि वहां तो हर दूसरी रील पर कोई ना कोई ज्ञान ही बांट रहा होता है और शायद जिनके पास सच्चा ज्ञान है उसकी बात कोई नहीं सुनेगा असल बात यह है कि हमारे पास इंस्टाग्राम पर देने के लिए घंटे तक समय है लेकिन शायद किसी अकेलेपन से परेशान या डिप्रेशन से जूझ रहे इंसान की बात सुनने के लिए या मदद करने के लिए समय नहीं है आजकल तो मदद भी फेमस होने के लिए की जाती है