Hindi Quote in Poem by Deepak Kumar Tiwari

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वह मिट्टी की सोंधी खुशबू, वह पीपल की ठंडी छाँव,
आज भी मुझको याद आता है, अपना वह प्यारा गाँव।

शहरी चकाचौंध में रहकर, दिल यह मेरा रोता है,
सच्चा सुख और चैन तो बस, गाँव की गोद में होता है।

वह पुराना पुश्तैनी घर, वह आँगन का फैला विस्तार,
जहाँ गूँजती रहती थी हरदम, अपनों की बातें और दुलार।

नीम के पेड़ तले वो सजती, दादा जी की चौपाल भली,
याद आती है बचपन वाली, वह धूल भरी तंग गली।


भले ढह गईं कुछ दीवारें, पर यादें अब भी ज़िंदा हैं,
छूट गया जो पीछे मेरा, हम उस पल के लिए शर्मिंदा हैं।


पैसा, रुतबा, महल-दुमहले, सब इसके आगे फीके हैं,
रिश्ते कैसे निभाए जाते, हमने तो गाँव में सीखे हैं।


चाहे जितनी दूर चला जाऊँ, यह बंधन टूट नहीं पाता,
मिट्टी से जो जुड़ा हुआ है, वह नाता छूट नहीं पाता।


जब भी थककर हारूँगा मैं, शहर की इस अंधाधुंध दौड़ से,
लौट आऊँगा अपने घर मैं, लिपटने अपनी माटी के छोर से।

Hindi Poem by Deepak Kumar Tiwari : 112035292
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