कृष्ण... एक ऐसा व्यक्तित्व जिसकी कल्पना तक नहीं हो सकती।
आज के कुछ दानव उसकी बराबरी करने चले हैं। उसके जैसा बनने चले हैं। जो यदि कोई काल्पनिक पात्र न होकर सच था तो वो एक युग पुरुष था तुम तो एक पुरुष तो बनो पहले कृष्ण बाद में बनना। उसके नाम पे छल करते हो उसने छल धर्म की ,सच की ,अच्छे लोगो की भलाई को किया तुम किसी को बुरा दिखाने के लिए कर रहे हो अच्छे तो कभी थे ही नहीं.. अपनी गंदगी ओर नीच नियत को छिपाने के लिए उसके नाम का इस्तेमाल करते हो क्यों उसे बदनाम करते हो??? द्रौपदी ने कृष्ण पर आंख बंद करके भरोसा किया उसने भी उसके विश्वास की भी लाज रखी.. जिस जिस ने उसे पुकारा वो गया उसकी मदद को कभी सखा, तो कभी प्रेमी, कभी भाई, कभी पति, कभी भगवान, कभी बेटा,कभी कुछ भी ना बनकर भी ..शर्त इतनी कि बस उसे पुकारा गया हो वो दौड़ा है। तुम आज के इंसान हो अपनी गंदी नियत और सोच को छिपाने के लिए कृष्ण के नाम का सहारा तो मत लो । एक सच्चा इंसान तो बनो... जो खुद किया है उसे तो कुबूल करो। कभी आईना तो देख कैसा लग रहा है किसी का बुरा करके???