मैंने देखा है बहुत क़रीब से औरतों को , विशेष कर अपनी मां को , मैं जब भी उन्हें देखती हूं तो मुझे उस औरत का एक हिस्सा पीछे बहुत दूर छोड़ा नज़र आता हैं । मैं जब भी देखती हूं उस औरत की ओर तो उस औरत को हसने के अलावा अपने लिए कुछ करना नहीं आता , ना जाने कैसे वो इतना सब कुछ सह जाती हैं । अपने सपनों को आग लगाये अपने बच्चों के ही सपनों में अपने सपने भी सजा लेती है । उस औरत को लगता हैं कि सब कुछ सह लेने से उसे थोड़ा ज्यादा प्यार और मिल जायेगा , शायद यही वजह कि वो सब कुछ सह जाती है ।