ख़ामोशियों का शहर
आज दिल कुछ ज़्यादा ही उदास है,
आँखें बिना वजह नम हैं…
कहने को बहुत कुछ है,
मगर लफ़्ज़ जैसे कहीं थम गए हैं।
समझ नहीं आता,
किस बात से शुरू करूँ,
किस दर्द को पहले कहूँ…
इसलिए शायद ख़ामोशी को ही
अपना हमराज़ बना लिया है।
रात आँखों में गुज़र जाती है,
और सुबह फिर चेहरे पर मुस्कान होती है…
लोग पूछते हैं— “सब ठीक है?”
और हम हमेशा की तरह कहते हैं—
“हाँ… बिल्कुल ठीक हूँ।”
बस दिल जानता है,
उस मुस्कान के पीछे
कितनी अनकही बातें छुपी हैं।
❤️sarwat fatmi❤️