भविष्य को लेकर डर और चिंता का भवरकभी-कभी इतना गहरा हो जाता है कि उसमें वर्तमान की सारी खुशियां डूब जाती है कहना बहुत आसान होता है कि भविष्य को लेकर डरो मत वर्तमान में जियो लेकिन असल में शायद कोई इंसान ऐसा कर ही नहीं पता हर किसी को कभी ना कभी अपने भविष्य की चिंता होती है हां लेकिन मुझे लगता है कि पशु पक्षी इस मामले में इंसान से ज्यादा अच्छे होते हैं उन्हें वैसा डर नहीं होता जैसा इंसानों को होता है कहा जाता है इंसान सबसे ऊपर है लेकिन सबसे ऊपर होने के लिए हमने कुछ ऐसी कीमत भी चुका दी है जिसका हमें एहसास तक नहीं है कभी अपने आसपास तालाब में तैरते हुए किसी हंस या मछली को देखकर सोचा है कि हम इतने तनाव मुक्त कब थे शायद कभी नहीं क्योंकि इंसान ऐसा होता ही नहीं है आजकल तो बचपन भी एक दौड़ की तरह हो गई है क्योंकि बच्चों को बचपना जीने हीं नहीं दिया जाता