तुम नदिया बन कर बह गए
मै पहाड़ों सी ख़ामोश रही
कभी पत्थर बन कर रोकना चाहा
तुम लहर बन कर निकल गए
मै सूखे पत्तो सी बिखर गई
तुम बसंत से निखर गए
मै बारिशों सी तुझ पर बरस गई
तुम बादल देख कर निकल गए
मै चांद सी तुम्हे निहारती रही
ओर तुम..
तुम एक सितारा देख कर पिघल गए!!🫠