यह भी एक सत्य है कि हम सभी इस संसार में एक-दूसरे से पहली और अंतिम बार ही मिले हैं। यह जीवन एक ऐसी यात्रा है, जिसमें रास्ते भले ही कुछ समय के लिए साथ हों, लेकिन मंज़िल सबकी अपनी-अपनी है। देह छूटने के बाद न जाने हम कहाँ होंगे, किस रूप में होंगे। हम इस जीवनकाल के बाद कभी नहीं मिलेंगे और यदि कभी फिर मिले भी तो शायद एक-दूसरे को पहचानने की स्मृति ही न रहे और इस संसार की कोई भी भौतिक वस्तु वास्तव में हमारी नहीं है जो कुछ मिला है, यहीं से मिला है और एक दिन सब कुछ यहीं छोड़कर चले जाना है। फिर इस थोड़े से समय में अहंकार, ईर्ष्या, मनमुटाव और कटुता को अपने भीतर स्थान देकर जीवन को बोझिल क्यों बनाना।
जब अंततः सबको खाली हाथ ही जाना है, तो क्यों न इस छोटी-सी यात्रा को प्रेम, अपनापन और सद्भाव से जियो। किसी के लिए मुस्कान बनें, किसी के दुख में सहारा बनें और रिश्तों में शिकायतों से अधिक प्रेम को जगह दें। हो सकता है आज जिसके साथ हम बैठकर हँस रहे हैं, उसके साथ यह अवसर फिर कभी न मिले। इसलिए जो कहना है प्रेम से कहें, जो देना है दिल से दें और जो भूलना है उसे आज ही भूल जाएँ। जीवन बहुत छोटा है इसे एक-दूसरे से जीतने में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ प्रेम से जीने में सार्थकता है... हर हर महादेव 🙏