सच है, लोग अपनी चाय की चुस्कियों में¹ मशगूल रहेंगे. पर कभी-2 उसी चाय की भाप 1, किसी पुराने नुक्कड़ पर,या किसी शाम की उदासी 1, कोई अचानक रुककर सोचेगा; ‘यहाँ वो होता,तो बात कुछ और होती’ बस,किसी के ज़ेहन 1 आनेवाला वही एक ‘अचानक ठहरा हुआ पल’ मेरे होने की मुकम्मल गवाही दे जाएगा...🤍:)