तुम वो अधूरी ख़्वाहिश हो मेरी जो हर दुआ में सबसे पहले आती है,तुम्हें देखते ही इस दिल की धड़कनें न जाने क्यों बेकाबू हो जाती हैं।ज़माने भर की खुशियाँ एक तरफ़ और तुम्हारी वो एक मुस्कान एक तरफ़,तुम्हारी आँखों की इस सादगी में मेरी पूरी कायनात सिमट जाती है।तुमसे मिलकर ऐसा लगा जैसे भटकती हुई कश्ती को किनारा मिल गया,इस मतलबी दुनिया में जीने के लिए मुझे तुम्हारा बेपनाह सहारा मिल गया।बातें तो हज़ारों होती हैं महफ़िल में पर सुकून बस तुम्हारी खामोशी में आता है,जब भी लेता हूँ नाम तुम्हारा, ये चेहरा अपने आप ही मुस्कुराता है।अब तो रूह से रूह का ऐसा अटूट और गहरा नाता बन गया है तुमसे,बस तुम साथ रहो उम्र भर, क्योंकि तुम्हारे बिना यह ज़िंदगी अधूरी सी नज़र आती है।