डिप्रेशन के बारे में बातें तो सब लोग करते हैं लेकिन असल में डिप्रेशन के बारे में समझता कौन है सलाह देना आसान है लेकिन समझना मुश्किल और ऐसा भी हो सकता है कि उसे इंसान को कोई और दिक्कत हो जैसे एंजायटी इश्यू है घबराहट हो किसी बात की चिंता हो रही हो और ऐसे में कई लोगों को लगता है हमारे पास सुनने का टाइम नहीं है क्या अगर किसी ने सुन लिया तो उसे लगता है मैं कुछ भी नहीं कर सकता कोई सोचता है कि वह सुनकर ही बहुत बड़ा एहसान कर रहा है लेकिन जरा उस इंसान के बारे में सोचिए जिस पर यह सब कुछ बीत रही है उसे क्या लगता होगा क्या किसी ने सोचा है जब अपनी ही भावनाएं इंसान के खुद के समझ से परे हो जाए तो उसे कैसा लगता होगा कभी गुस्सा आ रहा होता है कभी भविष्य की चिंता होती है कभी रोने का मन कर रहा होता है कभी अकेलापन होता है कभी खुद की गलतियां दिखाई देती हैं और उन गलतियों पर पछतावा हो रहा है कभी लगता है मेरे साथ यह सब कुछ हो क्यों रहा है तो प्लीज अगर आपके आसपास ऐसा कोई है तो उस इंसान को आपकी बहुत जरूरत है ऐसी हालत में ना भूख प्यास का पता होता है ना अपनी भावनाओं का तो प्लीज उस इंसान के बारे में राय बनाना बंद कीजिए कईलोग तो आज भी डॉक्टर के पास नहीं जा पाते डिप्रेशन के इलाज के लिए कई लोग किसी से कुछ कहने से डरते हैं कि शायद सामने वाला हमारी बात समझ नहीं पाएगा और अगर किसी से कुछ कह भी दिया जाए तो उसकी राय होती है कि डिप्रेशन तो कुछ होता ही नहीं है एंजायटी और कुछ नहीं भविष्य को लेकर आपकी चिंता है यह सब सिर्फ ज्यादा सोचते रहने का परिणाम है लेकिन एक बार कोई अगर उस इंसान के बारे में भी सोच ले जिसके ऊपर यह सब बीत रही है तो शायद चीज थोड़ी आसान होगी