क्या कहूं उसे
जो अब तक पूरा हुआ नहीं
हां मांगा था पुरी सिद्दत से
उसको खुदा से मैने
पर खुदा ने मुझे वो दिया ही नहीं
पर निराश नहीं, मैं हूं अभी
क्योंकि हरा नहीं, मैं हूं अभी
कब तक खुदा देगा नहीं
जब तक इसे छोडूंगा नहीं
कभी उसका भी दिल पिघलेगा तब तो खुदा मुझे मेरा हक देगा
मैं हूं एक नाया दीवाना मंजिल का
शायद परवाना उस मंजिल का
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