मैं और मेरे अह्सास
रिश्तों के रंग
रिश्तों के रंग कभी बदलने नहीं चाहिए l
अपनों के मन कभी भटकने नहीं चाहिए ll
कभी राग कभी अनुराग तो होते रह्ते है l
खट्टी मीठी बातों से अटकने नहीं चाहिए ll
अपनों से ही जिंदगी में रंगीनियाँ कभी l
अपनी जिम्मेदारी से छटकने नहीं चाहिए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह