स्नेह की ज्योति
तुम हो स्नेह की दिव्य ज्योति,
आँगन में भर देती हो प्रियता की रंगत।
प्रियांशी-सी चंचल तुम नटखट,
दीप-सा हर मन जगमगा देती हो...।
सत्येंद्र-सी सत्य की आभा लेकर,
सुमित-सी सबकी सच्ची मीत,
फूलों-सा जीवन महका देती हो...।
वर्षा की बूंद-सी निर्मल,
अभिषेक-सी पावन तुम,
माथे पर शुभम की रौनक़ बनती हो...।
मौसम-सी शीतल छाँव हो,
अँधेरे में अंशुल-सी उजियारी हो...।
– एस.टी.डी. मौर्य ✍️