" तुम्हारी गलियों से हम अक्सर गुजरा करते हैं,
दोस्ती का बहाना लेकर, तेरे घर के पास ठहरा करते हैं
नजरें हमारी सिर्फ़ तुम्हारे पर ही होती है।
जब तुम आँगन में दिखाई देती हो
क्या तेरा रूप सुहाना है।
जैसे बागों में एक सफ़ेद गुलाब खिला हो
अक़्सर खुद से बातें करते है तेरी
मेरा दिल भी तुझे जताता है।
तुम एक बार हुकुम तो करो
ये अंधा दिल भी तुझे खोने से घबराता है, थोड़ा अजीब सा मसला है, तुम हमें कभी पलट कर देखते नहीं ओर जब तक तुम दिखाई देते हो तब तक हम अपनी आँखें बंद नहीं करते है
और इश्क़ भी ऐसा है मैं तुझे पाना चाहता हु पर तू मुझे जताती नहीं।
काश! होता तुम सीने से लग कर कहो" मुझसे शादी करोगे " हाय क्या होगा उस दिन मेरा जब तुम यू मुझे कहो.................
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$imbha verma 🔥✍🏻🥰
शायरी लवर