मनुष्य का अविष्कार
भगवान के बदले इंसान ने किया होता तो,
तो हम उसे बदल पाते।
कपड़ों की तरह गर दाग लग जाता कहीं,
कहीं कोई बात खाली रह जाती कहीं,
कोई निशान बन जाता कहीं
तो धो कर, सुखाकर
फिर से नया कर देते।
मन का क्या होना है
दिमाग को कितना धोना है समझ पाते।
गर न होती सुधा....
तो चन्दर भी कहा चन्दर हो पाता।