नदी की इच्छा
काश तूने न दिया होता
मुझको माता का दर्जा
मैं भी आज शान सेे बहती
शायद मैं भी होती जिंदा।
काश न होते तुम स्वार्थी
न देते मुझे पाखंड की आहुति
प्रदूषण का न देते उपहार
शायद मैं भी होती खुशहाल।
काश मेरा जन्म हो जाता,
मां नहीं, नदी माने ऐसे देश में,
रखते मुझे बनाकर नीला,
शायद न होता घुट-घुटकर जीना।
बुलबुल पाबड़ा