मिट्टी की खुशबू
जब-जब पहली बारिश आती है,
मिट्टी की खुशबू मुस्कुराती है।
सूखी धरती का हर कण जैसे,
जीवन की धुन फिर गुनगुनाती है।
नदियाँ गातीं, पत्ते हँसते,
बादल सपनों के रंग बरसते।
चिड़ियाँ अपने गीत सुनातीं,
फूल हवा में खुशबू बिखराते।
माँ की ममता जैसी छाया,
पिता का साहस, सच्ची माया।
घर का आँगन मंदिर लगता,
जहाँ प्रेम का दीपक जगता।
धन-दौलत सब यहीं रह जाती,
नेकी ही इंसान के संग जाती।
जो बाँट सके मुस्कान सभी में,
वही अमर कहलाता जग में।
मत ऊँचा होना केवल पद से,
ऊँचे बनो अपने सद्कर्म से।
ज्ञान बाँटो, प्रेम लुटाओ,
हर दिल में विश्वास जगाओ।
काँटों से भी राह बनाना,
गिरकर फिर से उठते जाना।
हार अगर जीवन में आए,
हिम्मत कभी न टूटने पाए।
सूरज रोज़ नया संदेशा लाता,
अंधियारा कब तक टिक पाता?
एक किरण उम्मीद की काफी,
जीवन फिर से खिल जाता।
चलो बनें हम दीप उजाले,
मिटाएँ मन के सारे जाले।
मानवता का हाथ थामकर,
प्रेम के गीत सदा हम गाएँ।
यही है जीवन, यही कहानी,
प्रेम सबसे बड़ी निशानी।
मिट्टी से आए, मिट्टी में मिलना,
बीच का सफ़र प्रेम से भरना।