समाज
देखो ' न अपने ' समाज को किस ज्ञान की तरफ जा रहा है। जब कोई दुर्घटना हो जाती है। तो ऐसा लगता है। शायद ऐसा अब नही होगा। अपराधी ' को सजा मिल कर सवक आ जायेगा। पर कुछ समय माहौल शान्त रहता है। फिर कोई काण्ड हो जाता है। तरह -तरह के काण्ड आखिर व्यक्ति सुरक्षित कहाँ पर है। अपराध परिवार से ही जन्म लेता है। अपराधी का लालच उसे कहाँ से कहाँ पहुॅच देता है। सोशल मीडिया . के जमाने में यह भूल जाता है। जन्ता जमी _आसमान सर पर उठा लेगा।
अपराधी का भविष्य मिट्टी बन जाता है। न जीने में न मरने में ' ज्ञान हमारे संस्कार ' संगत ' माहौल ' शिक्षा ' अच्छा होना चाहिए ' ' । हमारे समाज में बॉलीबुड अभिनेता या अभिनेत्री छोटे परदे वाले या ' बड़े परदे वाले या कोई भी अन्य विषय के फूहड़ व्यक्ति को सर आँखो पर बिठा लेते है। रील्स में बेहूदापन उसको भी हम हंस-हंसकर देखते है। क्या कभी किसी ने सोचा है। ये हमे क्या दे रहे है। क्या मिल रहा है। कोई समझदारी मिली क्या ? शायद नहीं। मैंगजीन अखबारों के फ्रेन्ट पेज पर कोई विज्ञापन में बड़ी सी इन लोगो की तस्वीर छपती है। तो देखकर लोगो को लगता है। कोई बड़ा काम करा है। जो छप रहा है। मेरी सोच शायद इन लोगो की जगह किसी शिक्षित ' व्यक्ति काययाब व्यक्ति का तस्वीर छपे तो लोगो को लगेगा ' देखकर ' मुझे पढ़ लिख कर इस के जैसा बनना है। तो समाज में सरस्वती ' शिक्षा फैलेगी जैसे फौजी ' न्यायधीश ' सी. ऐ इंजीनियर . डॉक्टर अफसर ' किसान .उद्योगपति . ' आदि इस से मन मे आयेगा ' मुझे इस के जैसा बनना है। किसी कामयाब बेटी, इससे बेटी पर अत्याचार करने वाला ( बलत्कार जैसा अपराध ) कुछ हद तक बेटी पर अत्याचार बन्द हो सकता है। शिक्षा से वंचित बेटी के मन में शिक्षा को लेकर जगरूकता बढ़ेगी । लिखने को तो बहुत कुछ है। पर व्यक्ति को सच्चाई से डरता है। लिपि पुती ' चापलूस तारीफ ' झूठी बातो पर खुश होता है।
हम सुधरेंगे - तो - समाज सुधरेगाा ' ।
- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein