बता मेरे मन तू क्या चाहता है
बता मेरे मन तू क्या चाहता है
कभी तो अचानक से खुश हो जाता है
एक मासूम बच्चे की तरह खिलखिलाता है
कभी रुला देता है मेरी आँखों को सावन की तरह
बता मेरे मन तू क्या चाहता है
कभी कुछ पाना चाहता है, सब खोकर भी
कभी खामोश हो जाता है, शान्त पानी की तरह
जिसमें एक कंकड़ भी फेंकों विचारों की
तो तूफान उठते हैं जलजले की तरह
बता मेरे मन तू क्या चाहता है
उड़ता है कभी आसमान में परिन्दों की तरह
कभी गुम हो जाता है आँखों से ख्वाबों की तरह
कभी नाचता है बेसुध होकर मयूर की तरह
कभी स्थिर हो जाता है एक चट्टान की तरह
बता मेरे मन तू क्या चाहता है ? ....
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली