पुरुष हमेशा पीछे रहे
अपने पिता को गले लगाने में
माँ की गोद में सर रख पाने में
अपनी पसंदीदा स्त्री से प्यार जताने में
पुरुष हमेशा पीछे रह गए
इन तीनों घटनाओं में अथाह प्रेम था इतना
प्रेम कि कोई एक घटना भी अगर घटित हो
तो पुरुष फफक-फफक के रो पड़े
पुरुष के पीछे रह जाने के पीछे
झिझक से कहीं ज्यादा मुझे डर लगा
वह डर उसे अंदर से रोक लेता है
यह कोई बाहरी ख़तरे का डर नहीं
यह भीतर का, बहुत गहरा और
सामाजिक रूप से गढ़ा हुआ डर है।