विवाह
हमारे यहाँ दो व्यक्तियों से पहले
शादी धर्म की होती है
जाति की होती है
परिवारों की होती है
नीतियों की होती है
परंपराओं की होती है
उम्र की भी होती है
हमारे यहाँ की शादी कभी भी
दो प्रेमियों की नहीं होती
उनकी इच्छाओं की नहीं होती
दो जोड़ों की ख़ुशियों की नहीं
होती उनके खुद के निर्णय की कभी नहीं होती
शायद समाज का मानना है
कि प्रेम के बंधन से ज्यादा मजबूत
सिर पर थोपा गया ज़िम्मेदारी का बंधन होता है।